हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® में सोलह
संसà¥à¤•ारों (षोडश संसà¥à¤•ार)
का उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया जाता है जो
मानव को उसके गरà¥à¤ में
जाने से लेकर मृतà¥à¤¯à¥ के
बाद तक किठजाते हैं।
इनमें से विवाह यजà¥à¤žà¥‹à¤ªà¤µà¥€à¤¤
इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ संसà¥à¤•ार बड़े
धूमधाम से मनाये जाते हैं।
वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ समय में सनातन
धरà¥à¤® या हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® के
अनà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¥€ गरà¥à¤à¤§à¤¾à¤¨ से
मृतà¥à¤¯à¥ तक १६ संसà¥à¤•ारों
में से पसार होते है।
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• कारà¥à¤¯ संसà¥à¤•ार से आरमà¥à¤ होता था। उस समय संसà¥à¤•ारों की संखà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ लगà¤à¤— चालीस थी। जैसे-जैसे समय बदलता गया तथा वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤à¤¤à¤¾ बढती गई तो कà¥à¤› संसà¥à¤•ार सà¥à¤µà¤¤: विलà¥à¤ªà¥à¤¤ हो गये। इस पà¥à¤°à¤•ार समयानà¥à¤¸à¤¾à¤° संशोधित होकर संसà¥à¤•ारों की संखà¥à¤¯à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ होती गई। गौतम सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में चालीस पà¥à¤°à¤•ार के संसà¥à¤•ारों का उलà¥à¤²à¥‡à¤– है।
महरà¥à¤·à¤¿ अंगिरा ने इनका अंतरà¥à¤à¤¾à¤µ पचà¥à¤šà¥€à¤¸ संसà¥à¤•ारों में किया। वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में सोलह संसà¥à¤•ारों का वरà¥à¤£à¤¨ हà¥à¤† है। हमारे धरà¥à¤®à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से सोलह संसà¥à¤•ारों की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ की गई है। इनमें पहला गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ संसà¥à¤•ार और मृतà¥à¤¯à¥ के उपरांत अंतà¥à¤¯à¥‡à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ अंतिम संसà¥à¤•ार है। गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के बाद पà¥à¤‚सवन सीमनà¥à¤¤à¥‹à¤¨à¥à¤¨à¤¯à¤¨ जातकरà¥à¤® नामकरण ये सà¤à¥€ संसà¥à¤•ार नवजात का दैवी जगतॠसे संबंध सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ के लिये किये जाते हैं।
नामकरण के बाद चूड़ाकरà¥à¤® और यजà¥à¤žà¥‹à¤ªà¤µà¥€à¤¤ संसà¥à¤•ार होता है। इसके बाद विवाह संसà¥à¤•ार होता है। यह गृहसà¥à¤¥ जीवन का सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ संसà¥à¤•ार है। हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® में सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ और पà¥à¤°à¥à¤· दोनों के लिये यह सबसे बडा संसà¥à¤•ार है जो जनà¥à¤®-जनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤° का होता है।
विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों में संसà¥à¤•ारों के कà¥à¤°à¤® में थोडा-बहà¥à¤¤ अनà¥à¤¤à¤° है लेकिन पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ संसà¥à¤•ारों के कà¥à¤°à¤® में गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ पà¥à¤‚सवन सीमनà¥à¤¤à¥‹à¤¨à¥à¤¨à¤¯à¤¨ जातकरà¥à¤® नामकरण निषà¥à¤•à¥à¤°à¤®à¤£ अनà¥à¤¨à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¨ चूड़ाकरà¥à¤® विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤‚ठकरà¥à¤£à¤µà¥‡à¤§ यजà¥à¤žà¥‹à¤ªà¤µà¥€à¤¤ वेदारमà¥à¤ केशानà¥à¤¤ समावरà¥à¤¤à¤¨ विवाह तथा अनà¥à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ ही मानà¥à¤¯ है।
गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ से विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤‚ठतक के संसà¥à¤•ारों को गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार à¤à¥€ कहते हैं। इनमें पहले तीन (गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ पà¥à¤‚सवन सीमनà¥à¤¤à¥‹à¤¨à¥à¤¨à¤¯à¤¨) को अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—रà¥à¤ संसà¥à¤•ार तथा इसके बाद के छह संसà¥à¤•ारों को बहिरà¥à¤—रà¥à¤ संसà¥à¤•ार कहते हैं। गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार को दोष मारà¥à¤œà¤¨ अथवा शोधक संसà¥à¤•ार à¤à¥€ कहा जाता है। दोष मारà¥à¤œà¤¨ संसà¥à¤•ार का तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ यह है कि शिशॠके पूरà¥à¤µ जनà¥à¤®à¥‹à¤‚ से आये धरà¥à¤® à¤à¤µà¤‚ करà¥à¤® से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ दोषों तथा गरà¥à¤ में आई विकृतियों के मारà¥à¤œà¤¨ के लिये संसà¥à¤•ार किये जाते हैं। बाद वाले छह संसà¥à¤•ारों को गà¥à¤£à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ संसà¥à¤•ार कहा जाता है।
पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल में पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• कारà¥à¤¯ संसà¥à¤•ार से आरमà¥à¤ होता था। उस समय संसà¥à¤•ारों की संखà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ लगà¤à¤— चालीस थी। जैसे-जैसे समय बदलता गया तथा वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤à¤¤à¤¾ बढती गई तो कà¥à¤› संसà¥à¤•ार सà¥à¤µà¤¤: विलà¥à¤ªà¥à¤¤ हो गये। इस पà¥à¤°à¤•ार समयानà¥à¤¸à¤¾à¤° संशोधित होकर संसà¥à¤•ारों की संखà¥à¤¯à¤¾ निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ होती गई। गौतम सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में चालीस पà¥à¤°à¤•ार के संसà¥à¤•ारों का उलà¥à¤²à¥‡à¤– है।
महरà¥à¤·à¤¿ अंगिरा ने इनका अंतरà¥à¤à¤¾à¤µ पचà¥à¤šà¥€à¤¸ संसà¥à¤•ारों में किया। वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ में सोलह संसà¥à¤•ारों का वरà¥à¤£à¤¨ हà¥à¤† है। हमारे धरà¥à¤®à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में à¤à¥€ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से सोलह संसà¥à¤•ारों की वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ की गई है। इनमें पहला गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ संसà¥à¤•ार और मृतà¥à¤¯à¥ के उपरांत अंतà¥à¤¯à¥‡à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ अंतिम संसà¥à¤•ार है। गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ के बाद पà¥à¤‚सवन सीमनà¥à¤¤à¥‹à¤¨à¥à¤¨à¤¯à¤¨ जातकरà¥à¤® नामकरण ये सà¤à¥€ संसà¥à¤•ार नवजात का दैवी जगतॠसे संबंध सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ के लिये किये जाते हैं।
नामकरण के बाद चूड़ाकरà¥à¤® और यजà¥à¤žà¥‹à¤ªà¤µà¥€à¤¤ संसà¥à¤•ार होता है। इसके बाद विवाह संसà¥à¤•ार होता है। यह गृहसà¥à¤¥ जीवन का सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ संसà¥à¤•ार है। हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® में सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ और पà¥à¤°à¥à¤· दोनों के लिये यह सबसे बडा संसà¥à¤•ार है जो जनà¥à¤®-जनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤° का होता है।
विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ धरà¥à¤®à¤—à¥à¤°à¤‚थों में संसà¥à¤•ारों के कà¥à¤°à¤® में थोडा-बहà¥à¤¤ अनà¥à¤¤à¤° है लेकिन पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ संसà¥à¤•ारों के कà¥à¤°à¤® में गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ पà¥à¤‚सवन सीमनà¥à¤¤à¥‹à¤¨à¥à¤¨à¤¯à¤¨ जातकरà¥à¤® नामकरण निषà¥à¤•à¥à¤°à¤®à¤£ अनà¥à¤¨à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤¶à¤¨ चूड़ाकरà¥à¤® विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤‚ठकरà¥à¤£à¤µà¥‡à¤§ यजà¥à¤žà¥‹à¤ªà¤µà¥€à¤¤ वेदारमà¥à¤ केशानà¥à¤¤ समावरà¥à¤¤à¤¨ विवाह तथा अनà¥à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ ही मानà¥à¤¯ है।
गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ से विदà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤‚ठतक के संसà¥à¤•ारों को गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार à¤à¥€ कहते हैं। इनमें पहले तीन (गरà¥à¤à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ पà¥à¤‚सवन सीमनà¥à¤¤à¥‹à¤¨à¥à¤¨à¤¯à¤¨) को अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤—रà¥à¤ संसà¥à¤•ार तथा इसके बाद के छह संसà¥à¤•ारों को बहिरà¥à¤—रà¥à¤ संसà¥à¤•ार कहते हैं। गरà¥à¤ संसà¥à¤•ार को दोष मारà¥à¤œà¤¨ अथवा शोधक संसà¥à¤•ार à¤à¥€ कहा जाता है। दोष मारà¥à¤œà¤¨ संसà¥à¤•ार का तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ यह है कि शिशॠके पूरà¥à¤µ जनà¥à¤®à¥‹à¤‚ से आये धरà¥à¤® à¤à¤µà¤‚ करà¥à¤® से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ दोषों तथा गरà¥à¤ में आई विकृतियों के मारà¥à¤œà¤¨ के लिये संसà¥à¤•ार किये जाते हैं। बाद वाले छह संसà¥à¤•ारों को गà¥à¤£à¤¾à¤§à¤¾à¤¨ संसà¥à¤•ार कहा जाता है।
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