अमरकोश संसà¥à¤•ृत के कोशों
में अति लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ और
पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ है। इसे विशà¥à¤µ का
पहला समानà¥à¤¤à¤° कोश
(थेसॉरसà¥) कहा जा सकता है।
इसके रचनाकार अमरसिंह
बताये जाते हैं जो
चनà¥à¤¦à¥à¤°à¤—à¥à¤ªà¥à¤¤ दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯
(चौथी शबà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¥à¤¦à¥€) के
नवरतà¥à¤¨à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• थे।
कà¥à¤› लोग अमरसिंह को
विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤¦à¤¿à¤¤à¥à¤¯ (सपà¥à¤¤à¤®
शताबà¥à¤¦à¥€) का समकालीन बताते
हैं। इस कोश में पà¥à¤°à¤¾à¤¯: दस
हजार नाम हैं जहाठमेदिनी
में केवल साढ़े चार हजार
और हलायà¥à¤§ में आठहजार
हैं। इसी कारण पंडितों ने
इसका आदर किया और इसकी
लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾ बढ़ती गई।
अमरकोश शà¥à¤²à¥‹à¤•रूप में रचित है। इसमें तीन काणà¥à¤¡ (अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯) हैं। सà¥à¤µà¤°à¥à¤—ादिकाणà¥à¤¡à¤‚ à¤à¥‚वरà¥à¤—ादिकाणà¥à¤¡à¤‚ और सामानà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿à¤•ाणà¥à¤¡à¤®à¥à¥¤ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• काणà¥à¤¡ में अनेक वरà¥à¤— हैं। विषयानà¥à¤—à¥à¤£à¤‚ शबà¥à¤¦à¤¾à¤ƒ अतà¥à¤° वरà¥à¤—ीकृताः सनà¥à¤¤à¤¿à¥¤ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के साथ-साथ इसमें लिङà¥à¤—निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ à¤à¥€ किया हà¥à¤† है।अनà¥à¤¯ संसà¥à¤•ृत कोशों की à¤à¤¾à¤‚ति अमरकोश à¤à¥€ छंदोबदà¥à¤§ रचना है। इसका कारण यह है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ पंडित "पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•सà¥à¤¥à¤¾' विदà¥à¤¯à¤¾ को कम महतà¥à¤µ देते थे। उनके लिठकोश का उचित उपयोग वही विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥ कर पाता है जिसे वह कंठसà¥à¤¥ हो। शà¥à¤²à¥‹à¤• शीघà¥à¤° कंठसà¥à¤¥ हो जाते हैं। इसलिठसंसà¥à¤•ृत के सà¤à¥€ मधà¥à¤¯à¤•ालीन कोश पदà¥à¤¯ में हैं। इतालीय पडित पावोलीनी ने सतà¥à¤¤à¤° वरà¥à¤· पहले यह सिदà¥à¤§ किया था कि संसà¥à¤•ृत के ये कोश कवियों के लिठमहतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ तथा काम में कम आनेवाले शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के संगà¥à¤°à¤¹ हैं। अमरकोश à¤à¤¸à¤¾ ही à¤à¤• कोश है।
अमरकोश का वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• नाम अमरसिंह के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° नामलिगानà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ है। नाम का अरà¥à¤¥ यहाठसंजà¥à¤žà¤¾ शबà¥à¤¦ है। अमरकोश में संजà¥à¤žà¤¾ और उसके लिंगà¤à¥‡à¤¦ का अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ या शिकà¥à¤·à¤¾ है। अवà¥à¤¯à¤¯ à¤à¥€ दिठगठहैं किनà¥à¤¤à¥ धातॠनहीं हैं। धातà¥à¤“ं के कोश à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होते थे (कावà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤•ाश कावà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ आदि)। हलायà¥à¤§ ने अपना कोश लिखने का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤œà¤¨ कविकंठ-विà¤à¥‚षणारà¥à¤¥à¤®à¥ बताया है। धनंजय ने अपने कोश के विषय में लिखा है - मैं इसे कवियों के लाठके लिठलिख रहा हूठ(कवीनां हितकामà¥à¤¯à¤¯à¤¾)। अमरसिंह इस विषय पर मौन हैं किंतॠउनका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ à¤à¥€ यही रहा होगा।
अमरकोश में साधारण संसà¥à¤•ृत शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के साथ-साथ असाधारण नामों की à¤à¤°à¤®à¤¾à¤° है। आरंठही देखिà¤- देवताओं के नामों में लेखा शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— अमरसिंह ने कहाठदेखा पता नहीं। à¤à¤¸à¥‡ à¤à¤¾à¤°à¥€ à¤à¤°à¤•म और नाममातà¥à¤° के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में आठशबà¥à¤¦ इस कोश में संगृहीत हैं जैसे-देवदà¥à¤°à¤¯à¤‚ग या विशà¥à¤¦à¥à¤°à¤¯à¤‚ग (334)। कठिन दà¥à¤²à¤°à¥à¤ और विचितà¥à¤° शबà¥à¤¦ ढूंढ़-ढूंढ़कर रखना कोशकारों का à¤à¤• करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ माना जाता था। नमसà¥à¤¯à¤¾ (नमाज या पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾) ऋगà¥à¤µà¥‡à¤¦ का शबà¥à¤¦ है (2734)। दà¥à¤µà¤¿à¤µà¤šà¤¨ में नासतà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¸à¤¾ ही शबà¥à¤¦ है। मधà¥à¤¯à¤•ाल के इन कोशों में उस समय पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत शबà¥à¤¦ à¤à¥€ संसà¥à¤•ृत समà¤à¤•र रख दिठगठहैं। मधà¥à¤¯à¤•ाल के इन कोशों में उस समय पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— के कारण कई पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत शबà¥à¤¦ संसà¥à¤•ृत माने गठहैं; जैसे-छà¥à¤°à¤¿à¤• ढकà¥à¤•ा गरà¥à¤—री (पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत गगà¥à¤—री) डà¥à¤²à¤¿ आदि। बौदà¥à¤§-विकृत-संसà¥à¤•ृत का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ है जैसे-बà¥à¤¦à¥à¤§ का à¤à¤• नामपरà¥à¤¯à¤¾à¤¯ अरà¥à¤•बंधà¥à¥¤ बौदà¥à¤§-विकृत-संसà¥à¤•ृत में बताया गया है कि अरà¥à¤•बंधॠनाम à¤à¥€ कोश में दे दिया। बà¥à¤¦à¥à¤§ के 'सà¥à¤—त' आदि अनà¥à¤¯ नामपरà¥à¤¯à¤¾à¤¯ à¤à¤¸à¥‡ ही हैं।
अपार हरà¥à¤· के साथ सूचित कर रहा हूठकि इस अमरकोश गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ का à¤à¤£à¥à¤¡à¥à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ à¤à¤ªà¥à¤²à¥€à¤•ेशन अà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ है । इसमें वरà¥à¤— के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उनके शबà¥à¤¦ तथा शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के परà¥à¤¯à¤¾à¤¯ पद को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¤¾ गया है । साथ ही उपयोगकरà¥à¤¤à¤¾ के सौलà¤à¥à¤¯ हेतॠसà¤à¥€ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का शबà¥à¤¦à¤•लà¥à¤ªà¤¦à¥à¤°à¥à¤® तथा वाचसà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¯à¤®à¥ के साथ साथ वीलियम मोनियर डिकà¥à¤¶à¤¨à¤°à¥€ तथा आपà¥à¤Ÿà¥‡ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ डिकà¥à¤¶à¤¨à¤°à¥€ à¤à¥€ दिया गया है । आशा है कि उपयोगकरà¥à¤¤à¤¾ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ अपना सहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ राय अवशà¥à¤¯ देंगे ।
अमरकोश शà¥à¤²à¥‹à¤•रूप में रचित है। इसमें तीन काणà¥à¤¡ (अधà¥à¤¯à¤¾à¤¯) हैं। सà¥à¤µà¤°à¥à¤—ादिकाणà¥à¤¡à¤‚ à¤à¥‚वरà¥à¤—ादिकाणà¥à¤¡à¤‚ और सामानà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿à¤•ाणà¥à¤¡à¤®à¥à¥¤ पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• काणà¥à¤¡ में अनेक वरà¥à¤— हैं। विषयानà¥à¤—à¥à¤£à¤‚ शबà¥à¤¦à¤¾à¤ƒ अतà¥à¤° वरà¥à¤—ीकृताः सनà¥à¤¤à¤¿à¥¤ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के साथ-साथ इसमें लिङà¥à¤—निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶ à¤à¥€ किया हà¥à¤† है।अनà¥à¤¯ संसà¥à¤•ृत कोशों की à¤à¤¾à¤‚ति अमरकोश à¤à¥€ छंदोबदà¥à¤§ रचना है। इसका कारण यह है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ पंडित "पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•सà¥à¤¥à¤¾' विदà¥à¤¯à¤¾ को कम महतà¥à¤µ देते थे। उनके लिठकोश का उचित उपयोग वही विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥ कर पाता है जिसे वह कंठसà¥à¤¥ हो। शà¥à¤²à¥‹à¤• शीघà¥à¤° कंठसà¥à¤¥ हो जाते हैं। इसलिठसंसà¥à¤•ृत के सà¤à¥€ मधà¥à¤¯à¤•ालीन कोश पदà¥à¤¯ में हैं। इतालीय पडित पावोलीनी ने सतà¥à¤¤à¤° वरà¥à¤· पहले यह सिदà¥à¤§ किया था कि संसà¥à¤•ृत के ये कोश कवियों के लिठमहतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ तथा काम में कम आनेवाले शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के संगà¥à¤°à¤¹ हैं। अमरकोश à¤à¤¸à¤¾ ही à¤à¤• कोश है।
अमरकोश का वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• नाम अमरसिंह के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° नामलिगानà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ है। नाम का अरà¥à¤¥ यहाठसंजà¥à¤žà¤¾ शबà¥à¤¦ है। अमरकोश में संजà¥à¤žà¤¾ और उसके लिंगà¤à¥‡à¤¦ का अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ या शिकà¥à¤·à¤¾ है। अवà¥à¤¯à¤¯ à¤à¥€ दिठगठहैं किनà¥à¤¤à¥ धातॠनहीं हैं। धातà¥à¤“ं के कोश à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होते थे (कावà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤•ाश कावà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ आदि)। हलायà¥à¤§ ने अपना कोश लिखने का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤œà¤¨ कविकंठ-विà¤à¥‚षणारà¥à¤¥à¤®à¥ बताया है। धनंजय ने अपने कोश के विषय में लिखा है - मैं इसे कवियों के लाठके लिठलिख रहा हूठ(कवीनां हितकामà¥à¤¯à¤¯à¤¾)। अमरसिंह इस विषय पर मौन हैं किंतॠउनका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ à¤à¥€ यही रहा होगा।
अमरकोश में साधारण संसà¥à¤•ृत शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के साथ-साथ असाधारण नामों की à¤à¤°à¤®à¤¾à¤° है। आरंठही देखिà¤- देवताओं के नामों में लेखा शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— अमरसिंह ने कहाठदेखा पता नहीं। à¤à¤¸à¥‡ à¤à¤¾à¤°à¥€ à¤à¤°à¤•म और नाममातà¥à¤° के लिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— में आठशबà¥à¤¦ इस कोश में संगृहीत हैं जैसे-देवदà¥à¤°à¤¯à¤‚ग या विशà¥à¤¦à¥à¤°à¤¯à¤‚ग (334)। कठिन दà¥à¤²à¤°à¥à¤ और विचितà¥à¤° शबà¥à¤¦ ढूंढ़-ढूंढ़कर रखना कोशकारों का à¤à¤• करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ माना जाता था। नमसà¥à¤¯à¤¾ (नमाज या पà¥à¤°à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¨à¤¾) ऋगà¥à¤µà¥‡à¤¦ का शबà¥à¤¦ है (2734)। दà¥à¤µà¤¿à¤µà¤šà¤¨ में नासतà¥à¤¯à¤¾ à¤à¤¸à¤¾ ही शबà¥à¤¦ है। मधà¥à¤¯à¤•ाल के इन कोशों में उस समय पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत शबà¥à¤¦ à¤à¥€ संसà¥à¤•ृत समà¤à¤•र रख दिठगठहैं। मधà¥à¤¯à¤•ाल के इन कोशों में उस समय पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— के कारण कई पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत शबà¥à¤¦ संसà¥à¤•ृत माने गठहैं; जैसे-छà¥à¤°à¤¿à¤• ढकà¥à¤•ा गरà¥à¤—री (पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत गगà¥à¤—री) डà¥à¤²à¤¿ आदि। बौदà¥à¤§-विकृत-संसà¥à¤•ृत का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¥€ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ है जैसे-बà¥à¤¦à¥à¤§ का à¤à¤• नामपरà¥à¤¯à¤¾à¤¯ अरà¥à¤•बंधà¥à¥¤ बौदà¥à¤§-विकृत-संसà¥à¤•ृत में बताया गया है कि अरà¥à¤•बंधॠनाम à¤à¥€ कोश में दे दिया। बà¥à¤¦à¥à¤§ के 'सà¥à¤—त' आदि अनà¥à¤¯ नामपरà¥à¤¯à¤¾à¤¯ à¤à¤¸à¥‡ ही हैं।
अपार हरà¥à¤· के साथ सूचित कर रहा हूठकि इस अमरकोश गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ का à¤à¤£à¥à¤¡à¥à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ à¤à¤ªà¥à¤²à¥€à¤•ेशन अà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ है । इसमें वरà¥à¤— के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° उनके शबà¥à¤¦ तथा शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ के परà¥à¤¯à¤¾à¤¯ पद को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¯à¤¾ गया है । साथ ही उपयोगकरà¥à¤¤à¤¾ के सौलà¤à¥à¤¯ हेतॠसà¤à¥€ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का शबà¥à¤¦à¤•लà¥à¤ªà¤¦à¥à¤°à¥à¤® तथा वाचसà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¯à¤®à¥ के साथ साथ वीलियम मोनियर डिकà¥à¤¶à¤¨à¤°à¥€ तथा आपà¥à¤Ÿà¥‡ अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ डिकà¥à¤¶à¤¨à¤°à¥€ à¤à¥€ दिया गया है । आशा है कि उपयोगकरà¥à¤¤à¤¾ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ अपना सहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ राय अवशà¥à¤¯ देंगे ।
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Amarkosh | Sanskrit
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